Saturday, March 17, 2012

लाठीचार्ज के खिलाफ विहिप का बंद


लाठीचार्ज के खिलाफ विहिप का बंद

जम्मू/एजेंसी।
Story Update : Saturday, March 17, 2012    4:26 PM
VHP close against lathi charge in jammu
जम्मू-कश्मीर के राजौरी में हुए पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के जम्मू में आहूत एक दिन के बंद का असर मिला जुला रहा।

बंद के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिये सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। क्षेत्र में कुछ दुकानें खुली थीं और मिनी बस समेत कई वाहन सड़कों पर देखे गए

http://www.amarujala.com/National/VHP-close-against-lathi-charge-in-jammu-24459.html 

इंडिया टूडे कॉन्क्लेव में नहीं आएंगे प्रणब और उमर



इंडिया टूडे कॉन्क्लेव में नहीं आएंगे प्रणब और उमर
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इंडिया टूडे कॉन्क्लेव में अपनी भागीदारी शनिवार को रद्द कर दी। सम्मेलन में विवादास्पद लेखक सलमान रुश्दी हिस्सा ले रहे हैं।
National-Hindustan / Sat, 17 Mar 2012 06:35:23 GMT

अगवा हिंदू महिलाओं की जांच को विशेष प्रकोष्ठ



अगवा हिंदू महिलाओं की जांच को विशेष प्रकोष्ठ
इस्लामाबाद। पाकिस्तानी संसदीय समिति ने पुलिस और सिंध प्रांत के अधिकारियों को हिंदू महिलाओं के अपहरण के मामलों को दर्ज करने और इस तरह की घटनाओं की जांच के लिए एक विशेष प्रकोष्ठ बनाने का निर्देश दिया है।
निचले सदन [नेशनल असेंबली] की मानवाधिकार स्थायी समिति ने एक बैठक के बाद यह निर्देश जारी किए। बैठक में सांसदों ने हिंदू महिलाओं के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के मुद्दे को उठाया।
International-Jagran / Sat, 17 Mar 2012 03:56:52 GMT

धारा 26 पर पक्षपाती नजरिया

मुसलमानों के हित का रखा जायेगा पूरा ख्याल: मुलायम

अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में 12 फीसदी का इजाफा

ईरानी नागरिकों के खिलाफ लुकआउट नोटिस

मुलायम ने दोहराया मुस्लिम आरक्षण का वादा

Friday, March 16, 2012

हिंदू लड़कियों की जबरन शादी का कड़ा विरोध



हिंदू लड़कियों की जबरन शादी का कड़ा विरोध
-पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों की जबरन शादी और अपहरण के ख़िलाफ़ सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया और मांग की कि अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान की जाए और जबरन शादी के ख़िलाफ़ क़ानून बनाया जाए.
www.bhaskar.com | international news / Fri, 16 Mar 2012 06:00:00 GMT
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दुविधा व तनाव में जी रहे हैं पाकिस्तान के हिंदू

Friday, March 9, 2012

मूर्ति विसर्जन के दौरान उपजे विवाद में आधा दर्जन लोग घायल

दैनिक जागरण, सिद्धार्थनगर, 15 अक्टूबर २००८। इटवा थाना क्षेत्र के ग्राम शाहपुर बाजार में मंगलवार की रात राप्ती नदी के समीप मूर्ति विसर्जन के दौरान विवाद होने से आधा दर्जन लोग घायल हो गये। इस मामले में पुलिस ने इस मामले में चार नामजद एवं कुछ आज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रात्रि 10 बजे के आस पास दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान राप्ती नदी के समीप ग्राम चौखड़ा के कुछ बच्चे डांस कर रहे थे। उसी बीच में एक शाहपुर का बच्चा भी आकर डांस करने लगा। इस दौरान कुछ विवाद शुरू हुआ। विवाद बढ़ते-बढ़ते पथराव शुरू हो गया, जिसमें छ: लोग घायल हो गये। घटना कि सूचना पाकर थानाध्यक्ष इटवा वी.पी. उपाध्याय, उपनिरीक्षक हीरा सिंह मय हमराही घटना स्थल पहंचे गये, लेकिन चौखड़ा गांव से भारी संख्या में लोगों के पहुंच जाने से स्थिति बिगड़ती नजर आयी, चौराहे की दुकाने बंद हो गयी। थानाध्यक्ष डुमरियागंज जय राम गौतम के पहुंचने पर घायलों को उपचार हेतु समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र इटवा लाया गया। वादी ओम प्रकाश यादव पुत्र मगरू ग्राम चौखड़ा थाना इटवा की तहरीर पर पुलिस ने चार नामजद तथा कुछ अज्ञात के विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत किया है। पुलिस के मुताबिक विवाद का कारण शराब पीकर डांस करना है। पुलिस ने चार नामजद तथा कुछ अज्ञात अभियुक्तों के विरुद्ध धारा 147, 336 आईपीसी के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है।

मलेशिया: योग पर बैन को लेकर बहस

दैनिक जागरण, ३१ अक्टूबर २००८, कुआलालंपुर। मलेशिया में योग पर प्रतिबंध को लेकर विभिन्न धर्मो के विद्वानों में बहस छिड़ गई है। इस बहस में चिकित्सक और योगकर्मी भी शामिल हो चुके है।
संभावना इस बात की है मलेशिया की 'नेशनल फतवा काउंसिल' मुसलमानों के योग करने पर प्रतिबंध लगा सकती है। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई ऐलान नहीं हुआ है।
केबांगसान विश्वविद्यालय में इस्लामिक अध्ययन केंद्र के प्राध्यापक जकारिया स्तपा के मुताबिक योग का मूल संबंध हिंदू धर्म से है इसलिए इसका अभ्यास करने से मुसलमान इस्लाम की शिक्षा से विमुख हो सकते हैं।
हिंदू विद्वानों का कहना है कि योग को धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए। इसके साथ ही चिकित्सक और योगकर्मी भी योग को धर्म से जोड़े जाने को उचित नहीं मानते।
'मलेशियन मुस्लिम सोलिडेरिटी मूवमेंट' के अध्यक्ष जुल्किफली मोहम्मद का कहना है कि योग एक व्यायाम है और इससे दिमाग को शांति मिलती है। इसमें इस्लाम से विमुख करने वाली कोई बात नहीं है।
समाचार पत्र 'न्यू स्ट्रेट्स टाइम्स' में सुलेहा मेरिकवन नामक एक मुस्लिम महिला ने कहा है कि जब उनका इस्लाम में गहरा यकीन है तो वह योग से कैसे खत्म हो सकता है। वह कई वर्षो से योगाभ्यास कर रही है। 'मलेशिया हिंदू संगम' के अध्यक्ष ए. वैथलिंगम का कहना है कि योग को कई देशों में धर्म और संस्कृति से अलग स्वीकार किया गया है।

गाय काटते हुए पांच बंदी, तीन फरार

दैनिक जागरण, ५ जून २००९, रायबरेली। दिनदहाड़े गाय का वध करने के दौरान पांच लोगों को पुलिस ने बंदी बना लिया। उनके तीन सहयोगी मौके से भागने में सफल रहे। घटना शहर कोतवाली क्षेत्र के खतराना मोहल्ले की है।
प्रभारी कोतवाल सुर्खाब खां ने बताया कि गुरुवार को प्रात: मुखबिर से सूचना मिली कि खतराना मोहल्ले में पुराने स्लाटर हाउस के पीछे साड़ियों में कुछ लोग एक गाय का वध कर रहे हैं। सूचना पर तुरंत दबिश दी गयी तो वहां आठ लोग गाय काटते मिले। लेकिन पकड़ में पांच ही लोग आ सके। तीन अन्य भागने में सफल हो गये। मौके से काटी गयी गाय का मांस, औजार तथा तराजू-बांट बरामद हुआ। पकड़े गये लोगों में खतराना मोहल्ले के शहजादे उसका भाई राशिद व रफीक, नदीतीर मोहल्ला निवासी मोनू उर्फ कौआ तथा अमरनगर निवासी रामूपाल शामिल हैं। सभी को गोवध निवारण अधिनियम में बंदी बनाकर जेल भेज दिया गया। पुलिस अधीक्षक डीसी मिश्र ने पुलिस दल को ढाई हजार रूपये का नगद पुरस्कार दिये जाने की घोषणा कर दी है। उधर गाय काटे जाने की सूचना से शहर में आक्रोश फैल गया है। विश्व हिंदु परिषद के जिलाध्यक्ष हरिशचंद्र शर्मा के नेतृत्व में लोग एकत्र होकर तुरंत कोतवाली की ओर चल पड़े। जनाक्रोश को देखते हुए भदोखर व मिलएरिया थानों का फोर्स भी बुला लिया गया। पुलिस उपाधीक्षक रविशंकर निम ने लोगों को आश्वस्त किया कि गोहंताओं को गैंगस्टर एक्ट में निरूद्ध करने के साथ ही उन पर रासुका भी तामील की जायेगी। इस पर लोगों का गुस्सा शांत हो गया।

दबंगई से चल रहा था अवैध चर्बी कारोबार

दैनिक जागरण, 25 जून 2009, आगरा। झरना नाले के निकट अवैध रूप से चर्बी निकालने और उससे देशी घी बनाने के लिए सप्लाई करने का कारोबार दबंगई से चल रहा था। किराये पर जमीन देने के बाद जब किसानों को इस धंधे की भनक लगी तो उन्होंने अपनी भूमि खाली कराने को कहा लेकिन कारोबार में लिप्त लोगों ने उनको डरा- धमकाकर शांत कर दिया।

इस आशय के शपथ पत्र झरना नाले के जंगल में स्थित उस जमीन के मालिक किसानों ने न्यायालय और पुलिस के समक्ष दिये हैं, जहां चर्बी का अवैध ठिकाना संचालित था। नगला रामबल के कवेला निवासी काश्तकार देवीराम, बच्चू सिंह, रमेश चंद, दिनेश चंद पुत्र परसादी लाल ने अपने अधिवक्ता बंशो बाबू के जरिए यह शपथ पत्र दिये हैं। इंस्पेक्टर एत्मादपुर को इसके लिए अवगत कराया है कि करीब सवा दो साल पहले मंगल खां नामक व्यक्ति उनके पास आया था। उसके साथ मेरठ निवासी नौशाद, ग्यास, फारुख निवासी रेलवे क्वाटर छलेसर, पप्पू खां निवासी पीला खार एत्माद्दौला थे। मंगल खां के कहने पर ही उन्होंने मुर्गी का दाना बनाने के लिए जमीन किराये पर दी। किसानों का कहना है कि उपजाऊ भूमि होने के कारण हमने उसे किराए पर दे दिया। करीब आठ माह पहले जब क्षेत्र में बदबू फैलने लगी तो दूसरे ग्रामीणों ने आकर बताया कि वहां चर्बी निकालने का धंधा हो रहा है। किसानों के मुताबिक उन्होंने मंगल खां और पप्पू आदि से जमीन खाली करने को कहा था उन्होंने डरा-धमकाकर शांत करा दिया। साथ ही कहा कि हमारी बहुत ऊपर तक पहुंच है। इसके बाद ही क्षेत्रीय नागरिकों के सहयोग से अधिकारियों के यहां शिकायत की गयीं। फिर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव नेतराम यहां आये तो उनको अवगत कराया गया। किसानों का कहना है कि उनका इस अवैध कारोबार से कोई सम्बन्ध नहीं था। ही वह जमीन किराये पर देने के बाद कभी खेतों की तरफ गये।

मंदिर अशुद्ध करने के मामले में दो समुदायों में मारपीट

Monday, March 5, 2012

त्रासदी का विचित्र तमाशा


-स्वप्न दासगुप्ता
यह कटु लग सकता है, किंतु जिस तरह मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भयावह गुजरात दंगों की दसवीं वर्षगांठ को पीड़ितों के उत्सव में बदला है वह बेहद घृणित है। पीड़ितों को गले लगाने के लिए दिग्गज पत्रकार अहमदाबाद की दौड़ लगा रहे थे। दंगों में अपनी जान बख्शने की गुहार लगा रहे कुतुबुद्दीन अंसारी के दुर्भाग्यपूर्ण अति-प्रचारित फोटोग्राफ का दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से दोहन किया गया। यह हिंसा को इतिहास के कूड़ेदान में फेंकने का संकल्प लेने का एक उचित अवसर हो सकता था, किंतु इसके बजाय यह महज तमाशा बनकर रह गया। हंगामेदार टीवी वार्ताओं में इसका पटाक्षेप हो गया।
घटनाओं के इस बदसूरत मोड़ के कारण स्पष्ट हैं। दस साल पहले गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस पर हुए जघन्य हमले से गुजरात में हिंसा भड़की। इस पूरे प्रकरण में 'न्याय' का राजनीतिक दोषारोपण में रूपातंरण हो गया। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को जिंदा बनाए रखा। अब मुद्दा दंगाइयों और अमानवीय कृत्य के जिम्मेदार लोगों को दंडित करने का नहीं रह गया है, बल्कि एक व्यक्ति-मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को राजनीतिक निशाना बनाना भर रह गया है। यह माना जा रहा है कि अगर मोदी पर व्यक्तिगत रूप से दंगों को बढ़ावा देने के आरोप में मामला दर्ज हो जाता है तो न्याय हासिल हो जाएगा। एक अतिरिक्त लाभ के रूप में मोदी राजनीतिक परिदृश्य से गायब भी हो जाएंगे। परिणामस्वरूप अगले लोकसभा चुनाव में उनके प्रधानमंत्री पद की दावेदारी की संभावना भी खत्म हो जाएगी। संक्षेप में, अगर आप नरेंद्र मोदी को हरा नहीं सकते, तो उन्हें अयोग्य ठहरा दो।
अगर नरेंद्र मोदी राजनीतिक रूप से कमजोर हो जाते तो उनके खिलाफ न्यायिक संघर्ष भी दम तोड़ देता। 2002 या 2007 के चुनाव में अगर मोदी हार जाते तो उससे यह आत्मतुष्ट निष्कर्ष निकाल लिया जाता कि गुजरात ने भी उसी तरह प्रायश्चित कर लिया जिस तरह उत्तर प्रदेश ने अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी को नकारकर किया था। एक्टिविस्टों का शिकंजा इसलिए कसता चला गया, क्योंकि इस बीच मोदी बराबर खुद को मजबूत करते चले गए और कांग्रेस एक प्रभावी चुनौती खड़ी करने की स्थिति में भी नहीं रही। परिणामस्वरूप, मोदी से निपटने का एकमात्र रास्ता यह रह गया कि उन्हें राजनीति से ही किनारे कर दिया जाए।
एक और पहलू गौरतलब है। पिछले दस वर्षो में नरेंद्र मोदी ने गुजरात का कायापलट कर दिया है। 2002 में सांप्रदायिक माहौल में चुनाव जीतने के बाद उन्होंने अपना ध्यान गुजरात के तीव्र विकास पर केंद्रित किया। गुजरात हमेशा से ही आर्थिक रूप से सशक्त राज्य रहा है और उद्यमिता तो जैसे गुजरातियों के डीएनए में समाई हुई है। मोदी के प्रयासों से गुजरात की विकास दर दहाई में प्रवेश कर गई। उन्होंने प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त किया, राज्य की राजकोषीय स्थिति को सुधारा, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया और सरकारी योजनाओं को ईमानदारी से चलाया। मोदी एक आदर्श प्रशासक हैं, जो कम से कम खर्च में प्रभावी शासन का मंत्र जानते हैं। 2007 में उनकी चुनावी जीत हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का परिणाम नहीं थी। इस जीत का श्रेय उनके सुशासन को जाता है। दूसरे, मोदी ने मुद्दे को सफलतापूर्वक हिंदू गौरव से गुजराती गौरव में बदल दिया। पिछले एक दशक में गुजरातियों के जनमानस में बड़ा बदलाव आया है। दरअसल, 1969 के दंगे के बाद से गुजरात एक दंगा संभाव्य राज्य बन गया था। 1969 के दंगे के बाद, 1971, 1972 और 1973 में गुजरात में भीषण दंगे हुए। इसके बाद लंबे अंतराल के बाद जनवरी 1982, मार्च 1984, मार्च से जुलाई 1985, जनवरी 1986, मार्च 1986, जनवरी 1987, अप्रैल 1990, अक्टूबर 1990, नवंबर 1990, दिसंबर 1990, जनवरी 1991, मार्च 1991, अप्रैल 1991, जनवरी 1992, जुलाई 1992, दिसंबर 1992 और जनवरी 1993 में दंगे हुए। इस दौरान गुजरात क‌र्फ्यू, सामाजिक असुरक्षा और हिंदू-मुस्लिम समुदायों में घृणा का साक्षी रहा। दंगों का यह सिलसिला पूरे गुजरात में चलता रहा। 1993 में सूरत में भीषण दंगे हुए थे।
मार्च 2002 के बाद से गुजरात में कोई दंगा नहीं हुआ है। वहां क‌र्फ्यू अतीत की बात बन गया है। इस असाधारण रूपांतरण का क्या कारण है? मोदी में बुराई ढूंढने वाले सेक्युलरिस्ट बिना सोचे-समझे इसका सतही जवाब यह देते हैं कि 2002 के दंगों के बाद गुजरात के मुसलमान इतने भयभीत हो गए हैं कि वे हिंदुओं के अत्याचारों का विरोध कर पाने की स्थिति में नहीं हैं। इस प्रकार की व्याख्या से तो यही लगता है कि दंगे मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग द्वारा शुरू किए जाते थे। इसका सही कारण यह है कि गुजरात में पिछले एक दशक में बड़े आर्थिक और प्रशासकीय बदलाव हुए हैं। पहला बदलाव तो यह हुआ कि प्रशासकीय और राजनीतिक नेतृत्व, दोनों ने 2002 के दंगों में भड़की हिंसा से निपटने की अक्षमता से सबक लिया है। पुलिस को सत्तारूढ़ दल के छुटभैये नेताओं की दखलंदाजी से मुक्त करते हुए खुलकर काम करने का मौका दिया गया है। अवैध शराब व्यापार और माफिया पर शिकंजा कसा गया है। इसके अलावा एक अघोषित समझ यह भी विकसित हुई है कि राज्य एक और दंगे की राजनीतिक कीमत नहीं चुका पाएगा। इसीलिए, वहां हिंदू उग्रवाद पर अंकुश लगाने के लिए विशेष ध्यान दिया गया है।
गुजरात में सबसे बड़ा परिवर्तन सामाजिक स्तर पर आया है। आज गुजरात एक ऐसा समाज है जो पैसा बनाने और आर्थिक अवसरों का लाभ उठाने में लगा हुआ है। खुशनुमा वर्तमान और संभावनाओं से भरे भविष्य ने गुजरातियों के मन में भर दिया है कि दंगे धंधे के लिए सही नहीं हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि दोनों समुदायों के बीच अतीत की कटुता खत्म हो गई है और उसका स्थान सौहा‌र्द्र ने ले लिया है। अब भी सांप्रदायिक टकराव होते हैं, किंतु सांप्रदायिक टकराव और सांप्रदायिक हिंसा में फर्क होता है। अगर आर्थिक और राजनीतिक अंकुश रहे तो सांप्रदायिक टकराव हमेशा सांप्रदायिक हिंसा में नहीं बदलते। गुजरात के मुसलमानों को अब राजनीतिक वरदहस्त हासिल नहीं है, जो उन्हें कांग्रेस के राज में हासिल था, किंतु इसकी क्षतिपूर्ति समृद्धि के बढ़ते स्तर से हो गई है। 2002 के दंगे भयावह थे, किंतु अब इस पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि जनसंहार के बाद के दस सालों में गुजरात में अमनचैन कायम है और वह अभूतपूर्व विकास की राह पर अग्रसर है। उत्सव इसी बात का मनाया जाना चाहिए।

बिहार में बनेगा दुनिया का सबसे विशाल मंदिर

Sunday, March 4, 2012

पाकिस्तान में 23 हिंदुओं का अपहरण

मेरठ में साम्प्रदायिक हिंसा, 30 घायल

नवभारत टाइम्स , २५-०४-२०११, मेरठ।। उत्तर प्रदेश के मेरठ में दो समुदाय के लोगों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद हुए पथराव में 10 पुलिस अधिकारियों सहित करीब 30 लोग घायल हो गए। हिंसा के सम्बंध में अब तक 17 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

हिंसा रविवार देर रात उस समय भड़की जब जिले के काजीपुरा कस्बे में कुछ युवकों ने कथित रूप से एक मस्जिद में घुसकर वहां के इमाम के साथ मारपीट की।

मारपीट करने वाले युवकों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर एक समुदाय के लोगों ने शास्त्री नगर इलाके में कई दुकानों रोडवेज बसों को आग के हवाले कर दिया। जैसे ही यह खबर फैली अलग-अलग इलाकों में दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने गये और एक दूसरे पर जमकर पथराव किया।

उपद्रवियों ने एम-ब्लाक पुलिस चौकी में आगजनी करके कई निजी वाहनों में तोड़फोड़ की। पुलिस को हालात काबू में करने के लिए उपद्रवियों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। जिले के पुलिस अधीक्षक प्रबल प्रताप सिंह ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि हिंसा और आगजनी करने के आरोप में अब तक 17 लोगों को हिरासत में लिया गया है। अन्य की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

सिंह ने कहा कि जांच की जा रही है कि कहीं इस हिंसा को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जान बूझकर तो नहीं भड़काया गया।

मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रजनीकांत मिश्रा ने कहा कि फिलहाल हालात तनावपूर्ण लेकिन पूरी तरह से काबू में है। पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर डेरा डालकर स्थिति पर नजर बनाये हुए हैं। मिश्रा ने इस बात से साफ इनकार किया कि उपद्रवियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की तरफ से गोली चलानी पड़ी।

अधिकारियों के मुताबिक तनावग्रस्त इलाकों में प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) के साथ आसपास के जिलों से बुलाए गए पुलिस बल को तैनात किया गया है। घायलों में सभी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। आईएएस ऑफिसर सुभाष चंद शर्मा ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और फिलहाल एहतियात के तौर पर शहर के सभी स्कूल, कॉलेजों को सोमवार को बंद रखने का आदेश दिया गया है।

Saturday, March 3, 2012

हिंदू लड़की को अगवा कर जबरन धर्म परिवर्तन कराया

पाकिस्तान में हिंदू लड़की को जबरन बनाया मुसलमान

जबरन इस्लाम कुबूल करवाए जाने पर भड़की हिंसा

हिंदू लड़की को मुस्लिम बनाया

पीएम की रैली में सांप्रदायिक सामग्री बंटी

Friday, September 9, 2011

Monday, August 29, 2011

बशीरगंज कांड में पांच गिरफ्तार, भेजा जेल

बशीरगंज कांड में पांच गिरफ्तार, भेजा जेल
याहू! जागरण
बहराइच, शहर के बशीरगंज में बुधवार की रात सांप्रदायिक विवाद को लेकर तनाव की स्थिति तो कम हुई है लेकिन सन्नाटा अब भी बरकरार है। पुलिस ने अलग-अलग मामलों में पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इन्हें शनिवार की रात गिरफ्तार किया गया था। पूरे क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान मुस्तैद हैं। आईजी, डीआईजी और पीएसी के दो कमांडेंट सहित छह वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हैं। उल्लेखनीय है कि बुधवार को धार्मिक स्थल ...


भाजपा कमेटी ने शुरू की बहराइच दंगे की जांच

भाजपा कमेटी ने शुरू की बहराइच दंगे की जांच
Pressnote.in
लखनऊ । बहराइच में हुई हालिया सांप्रदायिक हिंसा की जांच के लिए भारतीय जनता पार्टी की ओर से बनाई गई कमेटी रविवार को बहराइच पहुंच गई। पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्यदेव सिंह की अगुवाई वाली इस कमेटी में विधायक सुरेश्वर सिंह और रामनरेश रावत भी शामिल हैं । जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही को सौंपेगी ।


Monday, April 26, 2010

आगरा में दो समुदायों के बीच संघर्ष

Dainik Jagran 26 April 2010, आगरा। उगाही को लेकर तीन दिन पहले हुआ झगड़ा रविवार को बड़े संषर्ष में बदल गया। आगरा फोर्ट के सामने बिजलीघर चौराहे पर दोनों पक्ष टकराये। बाद में फोर्ट चौकी में मारपीट के बाद संघर्ष भड़क गया। घंटे भर तक पथराव हुआ। लूटपाट के बाद दुकानें फूंक दी गयीं। फुटपाथ बाजार की लपटों से शिवाजी मार्केट सुलग उठा और कई करोड़ की सम्पत्तिस्वाहा हो गयी। आग काबू करने के लिए सेना की फायर बिग्रेड की मदद ली गयी है। स्थिति को काबू करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। इसके बाद शहर में सेक्टर स्कीम लागू कर दी गयी है।

तीन दिन पहले बिजलीघर चौराहे पर अशोक जाटव और सुलेमान पक्ष के बीच झगड़ा हुआ था। जिसमें अशोक और उसका साथी घायल हुए थे। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर सुलेमान पक्ष के नौशाद को जेल भेज दिया। इससे सुलेमान गुट असंतुष्ट था।

रविवार दोपहर 11.30 बजे अशोक फिर मार्केट पहुंचा। वहां उसकी सुलेमान से कहासुनी हो गई। इस पर सुलेमान समर्थकों ने पुलिस चौकी पहुंचकर वहां बैठे अशोक को पीटा। पुलिस ने हमलावरों को खदेड़ दिया। इस सूचना से बाजार बंद हो गया।

इसी बीच नाला काजीपाड़ा रेलवे ब्रिज के नीचे दोनों समुदायों के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों में पथराव शुरू हो गया। इसके बाद अन्य बाजार भी बाजार बंद हो गये और भीड़ सड़कों पर उतर आयी। सड़क किनारे फुटपाथ पर खोखों में आग लगा दी गई। आग की लपटों में यहां की शिवाजी मार्केट स्वाहा हो गयी। लपटों पर काबू पाने की कोशिशें चल रही थी। तभी छीपीटोला रोड पर दुकानों में लूटपाट शुरू हो गयी। कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। आईजी विजय कुमार फोर्स के साथ पहुंचे तो उनकी गाड़ी को निशाना बनाकर छतों से पथराव शुरू हो गया। हालात काबू करने के लिए पुलिस ने कई राउंड रबर बुलेट चलायीं। पुलिस ने पथराव करने वाले आधा दर्जन युवकों को पकड़ लिया। इसकी खबर पर उपद्रवी रावली तिराहे पर पहुंच गये और वहां दुकानों में लूटपाट की। देखते ही देखते बाजार बंद हो गया। दो समुदायों के बीच के बवाल से मंटोला में तनाव है। आईजी विजय कुमार ने बताया कि हालात देखते हुए रेंज से फोर्स बुलाया गया है। उपद्रवियों की गिरफ्तारी की जाएगी। फिलहाल हालात सामान्य है। जिलाधिकारी एमके नारायण ने बताया कि सेक्टर स्कीम लागू कर दी गई है। जिन बस्तियों में तनाव है, वहां फोर्स तैनात है। हालात काबू में हैं

Thursday, April 22, 2010

प्रेमीयुगल फरार, गांव में तनाव

Dainik Jagran , 22 April 2010, छतारी (बुलंदशहर)। थाना क्षेत्र के एक गांव से एक प्रेमी युगल मंगलवार को फरार हों गया। युवती के दूसरे संप्रदाय का होने के कारण गांव में तनाव है। युवती के पिता ने वारदात की तहरीर थाना पुलिस को दे दी है।
थाना क्षेत्र के एक गांव के युवक से दूसरे संप्रदाय की युवती का प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों प्रेमी युगल चोरी-छुपके एक दूसरे से मिला करते थे। परिजनों ने जब इसका विरोध किया तो मंगलवार को प्रेमी युगल फरार हो गए। प्रेमी युगल के अलग-अलग संप्रदाय का होने के कारण गांव में तनाव व्याप्त है। युवती के पिता ने वारदात की तहरीर दी है। तहरीर में उसने कहा है कि उसकी पुत्री युवक के बहकावे में आकर घर से हजारों की नकदी और गहने अपने साथ ले गई है

Monday, April 19, 2010

धर्म परिवर्तन कराने के प्रयास में तीन युवक हिरासत में

Dainik Jagran, खड्डा (कुशीनगर), 18 अप्रैल। खड्डा थाना क्षेत्र के ग्रामसभा गैनही जंगल में रविवार को आयोजित समारोह में प्रभु यीशु का संदेश सुनाकर ग्रामीणों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने के प्रयास में लगे तीन युवकों को मुकामी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए युवकों से पूछताछ जारी है जिनमें दो नेपाल के बताये गये है।

पुलिस के अनुसार ग्राम सभा गैनही जंगल निवासी मंगरू पुत्र चोकट व केदार पुत्र बुचई के घर नेपाल से आये विश्वनाथ पुत्र निधुर निवासी गोपीगंज जमुनिया ग्रा.वि.प. व सवरू पुत्र बच्चन प्रभु यीशु की प्रार्थना करा रहे थे। इससे पहले उन्होंने बाईबिल साहित्य को समझा कर उपस्थित जगदीश राजभर पुत्र सदरी, शिव सागर वर्मा पुत्र झगरू वर्मा, रामचन्दर यादव पुत्र लक्ष्मी यादव, हीरालाल वरेण पुत्र सुन्दर वरेण सहित अन्य ग्रामीणों को प्रभु यीशु के मंत्रों से अभिमंत्रित जल को पिला कर सारे रोगों से छुटकारा दिलाने की बात भी कही। इसी बीच कार्यक्रम की सूचना पाकर कई हिन्दू नेता मौके पर पहुंच गये और दोनों युवकों को पकड़ लिया। कुछ देर बाद एसपी लव कुमार के निर्देश पर थानाध्यक्ष खड्डा देवेन्द्र सिंह पहुंच गये तथा युवकों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इसके पास से 100, 500 के नेपाली नोट, मोबाइल व ईसाई साहित्य बरामद किये। पूछताछ के बाद खड्डा पुलिस ने गैनही ग्राम निवासी अशोक चौधरी को भी हिरासत में ले लिया।

थानाध्यक्ष खड्डा देवेन्द्र सिंह ने कहा कि कि इस गांव में गरीबी और अशिक्षा ज्यादा है, जिसके चलते उन्हे अभी यह पता नहीं है कि कोई उनके धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित कर रहा है। रही बात कानून की तो भारत में कोई भी व्यक्ति अपने धर्म का प्रचार प्रसार कर सकता है। जब तक हमें किसी व्यक्ति द्वारा जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराये जाने की तहरीर नहीं मिलती, हम कुछ भी नहीं कर सकते।