Thursday, August 7, 2008

सिमी पर प्रतिबंध जारी रहेगा

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया [सिमी] पर फिलहाल रोक जारी रहेगी। बुधवार को सुप्रीमकोर्ट ने सिमी से प्रतिबंध हटाने के अनलाफुल एक्टीविटीज [प्रिवेंशन] ट्रिब्युनल के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

मंगलवार को ट्रिब्युनल ने सिमी पर प्रतिबंध लगाने वाली सात फरवरी की अधिसूचना रद कर दी थी केंद्र सरकार ने ट्रिब्युनल के इस आदेश को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी है।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम रोक आदेश पारित किया। पीठ ने सिमी को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब देने को कहा है। तब तक कोर्ट का रोक आदेश जारी रहेगा। इसके पहले केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सालीसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने ट्रिब्यूनल के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि ट्रिब्युनल ने अनलाफुल एक्टीविटीज [प्रिवेंशन] एक्ट के उपबंधों के खिलाफ जाकर आदेश दिया है। उसने सरकार द्वारा पेश दस्तावेज व 77 अधिकारियों की गवाही पर विचार नहीं किया। विभिन्न राज्यों के डीजीपी की गवाही हुई, इंटेलिजेंस रिपोर्ट थी, लेकिन ट्रिब्युनल ने किसी पर विचार नहीं किया। यहां तक कि 267 पेज के फैसले में से 251 पेज तक कोई निष्कर्ष नही है। कोई निश्चित राय व्यक्त नहीं की गई है। अचानक आदेश के अंत में आकर ट्रिब्युनल ने कह दिया कि प्रतिबंध जारी रखने का कोई पर्याप्त कारण नहीं बताया गया है और अधिसूचना रद कर दी।

सुब्रमण्यम ने कहा कि ट्रिब्युनल के आदेश के गंभीर परिणाम होंगे, अत: कोर्ट याचिका पर सुनवाई करने तक ट्रिब्युनल के प्रतिबंध हटाने के आदेश पर रोक लगा दे। याचिका में कहा गया है कि ट्रिब्युनल ने अधिसूचना निरस्त करते समय केंद्र सरकार की ओर से दाखिल किए गए बैकग्राउंड नोट पर ध्यान नहीं दिया। ट्रिब्युनल को यह बताया गया था कि प्रतिबंध की अधिसूचना जारी करने से पहले कैबिनेट से इसकी मंजूरी मिली थी और इसके बाद गृह मंत्रालय ने विधि मंत्रालय के साथ उच्च स्तर पर विचार विमर्श के बाद प्रतिबंध का आदेश पारित किया था। ट्रिब्युनल के सामने सील कवर में कैबिनेट नोट पेश किया गया था। उस पर विचार किया जाना चाहिए था। ट्रिब्युनल का यह मानना गलत है कि प्रतिबंध जारी करने के संबंध में जारी बैकग्राउंड नोट बाद में अधिसूचना की खामी पूरी करने के लिए जारी किया गया था।

सिमी पर 27 सितंबर 2001 को प्रतिबंध जारी किया गया था, जिसे सही ठहराया गया था। उसके बाद 26 सितंबर 2006 को प्रतिबंध की अधिसूचना जारी हुई और इसे भी सही ठहराया गया। अधिसूचना रद करने से पहले ट्रिब्युनल ने यह ध्यान नहीं दिया कि केंद्र सरकार की राय में सिमी कार्यकर्ता अभी भी सांप्रदायिक व राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। केंद्र सरकार ने सिमी पर प्रतिबंध को जायज ठहराने और ट्रिब्युनल का आदेश रद किए जाने के लिए और भी कई तर्क दिए हैं। (दैनिक जागरण, ७ august २००८)

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